देश और समाज की सेवा ही मेरी ज़िंदगी का मकसद:मो0 जमील सिद्दीकी

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–जीवन वही सार्थक है जो देश और समाज के काम आए

राजनीति नहीं विकास नीति में विश्वास करता हूँ मैं

सगीर ए ख़ाकसार । इंडो नेपाल पोस्ट

मैं अपने मुल्क हिंदुस्तान से बेपनाह मोहब्बत करता हूँ।सियासत मुझे विरासत में नहीं मिली है ।सियासी सफर की शुरुआत मैंने खुद की है।क्योंकि सियासत अवाम की खिदमत का मौका फ़राहम कराती है।
यह विचार सपा नेता व शोहरतगढ़ विधान  के पूर्व प्रत्याशी मो0 जमील सिद्दीकी ने पिछले दिनों एक बातचीत में व्यक्त किया।जमील सिद्दीकी कहते हैं कि मैं राजनीति नहीं विकास नीति में विश्वास करता हूँ,  हार जीत से परेशान बिलकुल नहीं होता हूँ।हार और जीत ,उतार चढ़ाव तो ज़िन्दगी का एक हिस्सा है।सियासत भले ही विरासत में न मिली हो।लेकिन मोहब्बत,भाई चारा,गंगा यमुनी तहज़ीब ,प्रेम,करुणा ,दया, परोपकार,सर्वजन हिताय ,सर्वजन सुखाय का सन्देश तो मुझे विरासत में मिला है।वो भी अपनी मिटटी से ।अपने देश से।यहाँ की मिटटी में जो खुशबु है वो भला और कहाँ?
सिद्धार्थनगर के पूर्व चेयरमैन जमील सिद्दीक़ी आगे कहते हैं कि फख्र है मुझे मैंने बुद्ध की धरती सिद्धार्थ नगर में जन्म लिया।नगर का प्रथम नागरिक मुझे मेरे नगरवासियों ने बनाया।जिनकी सेवा करना मेरा सबसे बड़ा फ़रीज़ा है।सफर लंबा है।संघर्ष तगड़ा है।यही तो जीवन है।आपकी मोहब्बत ऊर्जा देती है।युवा बनाती है।सकारत्मक सोंच पैदा करती है।सफर लंबा है तो क्या हुआ?मुझे तो बस चलते जाना है।बिना किसी ठहराव के ।सतत और अनवरत।मेरा जीवन तनिक भी देश और समाज के काम आया ,तो समझूँगा मेरा जीवन सार्थक रहा। अन्यथा इस  जीवन का क्या मतलब ?बातचीत के आखिर में वो ये शेर सुनाते हैं,जिससे पता चलता है कि सियासत के लंबे सफर में वो जल्दी थकने,रुकने और हार मानने वाले नहीं हैं।


घनी है रात मगर सहर भी तो दूर नहीं

कितना बाकी है सफर सोंचना दस्तूर नहीं

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